
शनि देव को न्याय के देवता माना जाता है। जीवन में आने वाली कठिनाइयों और बाधाओं को दूर करने के लिए शनि चालीसा का पाठ अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इस लेख में हम शनि चालीसा के बारे में विस्तार से जानेंगे, इसके लाभ, पाठ के नियम और सही समय के बारे में समझेंगे।
शनि चालीसा क्या है?
शनि चालीसा भगवान शनिदेव की स्तुति में लिखी गई 40 चौपाइयों की एक पवित्र रचना है। यह चालीसा शनि देव की कृपा प्राप्त करने और उनके कोप से बचने के लिए पढ़ी जाती है। शनि चालीसा का नियमित पाठ करने से जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान होता है और मन को शांति मिलती है।
दशरथ कृत शनि चालीसा
दशरथ कृत शनि चालीसा सबसे प्रसिद्ध और प्रामाणिक शनि चालीसा मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान राम के पिता राजा दशरथ ने शनि देव की कृपा पाने के लिए इस चालीसा की रचना की थी। इस चालीसा में शनि देव के विभिन्न रूपों और उनकी महिमा का वर्णन किया गया है।
Shani Chalisa Lyrics (शनि चालीसा के बोल)
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करन कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥
चालीसा
जय जय शनि देव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा, तन श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥
सूर्यपुत्र दिनेश नमामी। छाया तनय, नाम सुख दामी॥
दंत द्विज, षड़ानन कर जोरे। भक्त, देव सब सुमन निछोरे॥
धनुष बाण हाथ में धारे। कृष्ण बर्ण षट भुज विस्तारे॥
मोर खड़ग व त्रिशूल कठिना। राखे सभी शरण जो पड़ना॥
पिंगल मनोहर उर माला। कर में कुंडल कमल विशाला॥
सत शरणागत मार्ग बनाये। भक्त साथ दुश्मन भगाये॥
बांयें कर में रखे कमल है। दाहिने करतल त्रिशूल संभाले॥
चढ़े गेद पर राजत देवा। करत सदा ब्रह्मादि कि सेवा॥
जो मनवांछित कर्म कमावे। सो सब कर्म फल आप पावे॥
दुर्जन को तो धर धर दौड़े। सज्जन को सब सम्पत्ति जोड़े॥
जो चोरी, झूठ कपट कमावै। ताहि सदा श्री शनि दुख पावै॥
काहू का माल ज्ञान हर लेवै। ताहि दण्ड शनि देव कु देवै॥
जो पर नारी पुरुष मन मावै। तातैं सदा देव दुख पावै॥
जो पर द्रव्य विरोधी लावै। तोहि सदा शनिदेव दुखावै॥
जो माता-पिता गुरु को परिहरै। शनि देव ताके तन को जरै॥
जो पाता देव न शास्त्र बतावै। ताहि कुदृष्टि शनि देव लखावै॥
जो सास-ससुर को हीन करे। ताहि सभी सम्पति शनि हरे॥
जो जाति भ्रष्ट सब काज करावै। शनि देव ताहि कुदृष्टि दिखावै॥
जो परम सत्य कर्म चित लावै। शनि देव ताको सुख सम्पति पावै॥
श्री राम शरणा मीठी लागे। दुःख पाप सब दूर भगे॥
जो जन भक्ति शनि की करई। तो सब दुःख दारिद्र्य हरई॥
जो लोग शनि को नित पूजै। ताकै नित नित सम्पति बढ़ै॥
जो शनि चालीसा नित गावै। ताकै सब दुःख दरिद्र मिटावै॥
आठ प्रहर जो मनुज गावै। ता सोने की लंका घर आवै॥
जामैं शनि का वास हो। सम्पत्ति धन का नाश हो॥
कसै ना काम आवै तब। हो दयालु शनि जब॥
राज्य छत्रछाया मिलै। मनवांछित पुत्र मिलै॥
धन धान्य की बृद्धि हो। रोग दोष की निवृत्ति हो॥
जो यह पाठ करै मन लाई। तापर होइ सदा सहाई॥
भक्ति मुक्ति सब तासु सुहाई। शनि प्रसन्न गति दे भगवान॥
धूप दीप नैवेद्य बनावै। शनि चालीसा नित्य सुनावै॥
पाठ करत मन कर्म वचन। तासु मनोरथ फल पावन॥
जो कोई शनि से पीड़ित होय। पाठ करै तो छूटे सोय॥
जो पढ़े शनि चालीसा नित। ताहि मिले सुख सम्पत्ति नित॥
शनि चालीसा को रटे जो। तापर कृपा करै शनि सो॥
छंद आरती आदि बखानी। विनती सुनो शनि महाराज॥
दोहा
कीजै कृपा हे रवि तनय, राखो जन की लाज।
पाप मिटाओ शनि प्रभु, करो सदा सहबाज॥
शनि चालीसा पढ़ने के फायदे
शनि चालीसा का नियमित पाठ करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं:
आर्थिक समृद्धि: शनि चालीसा का पाठ करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और धन की प्राप्ति होती है। व्यापार और नौकरी में उन्नति मिलती है।
कानूनी समस्याओं से मुक्ति: न्यायालय में चल रहे मामलों में राहत मिलती है और कानूनी परेशानियां दूर होती हैं।
मानसिक शांति: शनि चालीसा के पाठ से मन को शांति मिलती है और तनाव कम होता है। नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
स्वास्थ्य लाभ: दीर्घकालिक रोगों में आराम मिलता है, विशेष रूप से पैरों, हड्डियों और जोड़ों से संबंधित समस्याओं में राहत मिलती है।
बाधाओं से मुक्ति: जीवन में आने वाली विभिन्न बाधाएं और रुकावटें दूर होती हैं। कार्यों में सफलता मिलती है।
शत्रुओं से रक्षा: शत्रुओं की बुरी नजर और उनके प्रयासों से सुरक्षा मिलती है।
साढ़े साती और ढैय्या से राहत: शनि की साढ़े साती और ढैय्या के दौरान होने वाली परेशानियों में कमी आती है।
पारिवारिक सुख: घर में शांति और सुख का वातावरण बनता है। परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है।
करियर में प्रगति: नौकरी या व्यवसाय में तरक्की मिलती है। मेहनत का उचित फल प्राप्त होता है।
आत्मविश्वास में वृद्धि: शनि चालीसा का पाठ करने से आत्मबल बढ़ता है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
क्या शनि चालीसा रोज पढ़ सकते हैं?
हां, शनि चालीसा का प्रतिदिन पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी है। नियमित रूप से शनि चालीसा पढ़ने से शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कुछ महत्वपूर्ण बातें:
दैनिक पाठ की महत्ता: प्रतिदिन शनि चालीसा पढ़ने से शनि देव प्रसन्न रहते हैं और जीवन में स्थिरता आती है।
शनिवार का विशेष महत्व: यद्यपि रोज पाठ कर सकते हैं, लेकिन शनिवार के दिन शनि चालीसा का पाठ विशेष फलदायी होता है।
निरंतरता जरूरी: एक बार शुरू करने के बाद नियमित रूप से पाठ जारी रखना चाहिए। बीच में छोड़ना उचित नहीं है।
संख्या का महत्व: कुछ लोग 40 दिन तक लगातार पाठ करने की मनौती लेते हैं, जो बहुत प्रभावशाली होती है।
एकाग्रता से पाठ: रोज पाठ करते समय मन को एकाग्र रखना और श्रद्धा से पढ़ना आवश्यक है।
शनि चालीसा पढ़ने के नियम
शनि चालीसा के पाठ से अधिकतम लाभ पाने के लिए कुछ नियमों का पालन करना चाहिए:
स्नान और पवित्रता: पाठ करने से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
पूजा स्थान: एक निश्चित और पवित्र स्थान पर बैठकर पाठ करें। यदि संभव हो तो शनि देव की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें।
दीपक जलाना: तेल का दीपक जलाकर पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। काले तिल के तेल का दीपक विशेष फलदायी है।
धूप और अगरबत्ती: पाठ के समय धूप या अगरबत्ती जलाना शुभ होता है।
आसन: कालीन, चटाई या आसन पर बैठकर पाठ करें। जमीन पर सीधे न बैठें।
दिशा: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ होता है।
प्रसाद: काले तिल, उड़द की दाल, या काले चने का प्रसाद चढ़ाना अच्छा होता है।
मौन और एकाग्रता: पाठ के समय व्यर्थ की बातें न करें और पूरी एकाग्रता से पढ़ें।
नियमितता: एक बार जो समय तय करें, उसी समय पर नियमित रूप से पाठ करें।
श्रद्धा और विश्वास: पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ पाठ करना अत्यंत आवश्यक है।
मनोकामना: पाठ शुरू करने से पहले शनि देव से अपनी मनोकामना कहें और उनसे आशीर्वाद मांगें।
आरती: पाठ के बाद शनि देव की आरती करना शुभ होता है।
शनि चालीसा पढ़ने का सही समय
शनि चालीसा के पाठ के लिए सही समय का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है:
शनिवार की महत्ता: शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित है। इस दिन पाठ करना सबसे अधिक फलदायी होता है।
सूर्योदय से पहले: प्रातःकाल सूर्योदय से पहले का समय पाठ के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस समय का वातावरण शुद्ध और शांत होता है।
संध्याकाल: यदि सुबह पाठ संभव न हो तो शाम के समय सूर्यास्त के बाद भी पाठ कर सकते हैं।
रात्रि का समय: कुछ विद्वानों के अनुसार रात्रि में भी शनि चालीसा का पाठ किया जा सकता है, विशेषकर शनिवार की रात।
दोपहर का समय: दोपहर के समय पाठ करने से बचना चाहिए। यह समय उपयुक्त नहीं माना जाता।
अमावस्या और प्रदोष काल: अमावस्या के दिन और प्रदोष काल में पाठ विशेष फलदायी होता है।
साढ़े साती के दौरान: यदि आपकी कुंडली में शनि की साढ़े साती चल रही हो तो नियमित रूप से पाठ करना अत्यंत लाभकारी है।
दशा अनुसार: शनि की दशा या अंतर्दशा चल रही हो तो विशेष रूप से पाठ करना चाहिए।
निश्चित समय: जो भी समय चुनें, उसी समय पर नियमित रूप से पाठ करने से अधिक लाभ मिलता है।
शनि के चमत्कारी उपाय
शनि चालीसा के पाठ के साथ-साथ कुछ चमत्कारी उपाय भी किए जा सकते हैं:
तेल का दान: शनिवार को तेल (विशेषकर सरसों या तिल का तेल) दान करना अत्यंत शुभ होता है। गरीबों या मंदिर में तेल दान करें।
काले वस्त्र दान: काले रंग के वस्त्र, काली उड़द की दाल, या काला कंबल दरिद्रों को दान करना शनि को प्रसन्न करता है।
लोहे का दान: लोहे की वस्तुएं दान करना शुभ होता है। लोहे की कड़ाही या अन्य लोहे की चीजें दान कर सकते हैं।
पीपल की पूजा: शनिवार को पीपल के पेड़ की परिक्रमा करना और उस पर जल चढ़ाना लाभकारी है।
हनुमान जी की आराधना: शनिवार को हनुमान जी की पूजा करना और हनुमान चालीसा का पाठ करना शनि के कुप्रभावों को कम करता है।
शनि यंत्र की स्थापना: घर या व्यापार स्थल पर शनि यंत्र की स्थापना करना शुभ होता है।
नीलम धारण: योग्य ज्योतिषी की सलाह से नीलम रत्न धारण करना शनि को प्रसन्न करता है। बिना सलाह के नहीं पहनना चाहिए।
गरीबों की सेवा: शनिवार को गरीबों और असहाय लोगों की सेवा करना बहुत फलदायी होता है।
काले कुत्ते को भोजन: शनिवार को काले कुत्ते को रोटी खिलाना शुभ माना जाता है।
शनि मंदिर में दर्शन: नियमित रूप से शनि मंदिर जाकर दर्शन करना और चढ़ावा चढ़ाना लाभकारी है।
काले तिल का दान: काले तिल का दान करना या उनसे बने व्यंजन दान करना शनि को प्रसन्न करता है।
शनि स्तोत्र का पाठ: शनि चालीसा के अलावा शनि स्तोत्र और शनि मंत्र का जाप करना भी फलदायी है।
व्रत रखना: शनिवार को व्रत रखना और केवल एक समय भोजन करना शुभ होता है। भोजन में नमक का प्रयोग कम करें।
दीये का दान: शनिवार को मंदिर में तेल के दीये दान करना चाहिए। 7 या 11 दीये जलाना विशेष फलदायी है।
काले वस्त्र धारण: शनिवार को काले या नीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है।
शनि चालीसा पाठ से जुड़ी सावधानियां
शनि चालीसा का पाठ करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
नियमितता बनाए रखें: एक बार शुरू करने के बाद पाठ बीच में न छोड़ें। यदि किसी कारणवश एक दिन छूट जाए तो अगले दिन क्षमा मांगकर पुनः शुरू करें।
शुद्ध उच्चारण: चालीसा के शब्दों का शुद्ध उच्चारण करने का प्रयास करें। गलत उच्चारण से लाभ कम हो सकता है।
पाठ के समय मोबाइल बंद रखें: पाठ के दौरान मोबाइल फोन बंद रखें और किसी भी प्रकार के विघ्न से बचें।
अशुद्धता से बचें: मासिक धर्म या सूतक के दौरान महिलाओं को पाठ से परहेज करना चाहिए।
मांसाहार और मदिरा से परहेज: पाठ के दिन मांसाहार और मदिरा का सेवन न करें। शुद्ध शाकाहारी भोजन करें।
क्रोध और अहंकार त्यागें: पाठ के समय और उसके बाद भी क्रोध, अहंकार और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहें।
दूसरों का अनादर न करें: किसी का अपमान या अनादर न करें। विशेषकर बुजुर्गों और गुरुजनों का सम्मान करें।
झूठ न बोलें: सत्य बोलने का प्रयास करें। शनि देव सत्य और न्याय के देवता हैं।
धैर्य रखें: पाठ का फल तुरंत न मिले तो निराश न हों। धैर्य रखें और श्रद्धा से पाठ जारी रखें।
शनि चालीसा के पाठ की अवधि
शनि चालीसा के पाठ की अवधि के बारे में कुछ मान्यताएं हैं:
40 दिन का पाठ: सामान्यतः 40 दिनों तक लगातार पाठ करने की सलाह दी जाती है। यह एक पूर्ण चक्र माना जाता है।
साढ़े साती की अवधि: यदि साढ़े साती चल रही है तो पूरी अवधि तक नियमित पाठ करना चाहिए।
आजीवन पाठ: कुछ भक्त आजीवन नियमित रूप से शनि चालीसा का पाठ करते हैं, जो सर्वोत्तम माना जाता है।
विशेष संकट काल: किसी विशेष संकट या समस्या के समय तब तक पाठ करें जब तक समस्या का समाधान न हो जाए।
शनि चालीसा का महत्व
शनि देव को धीमी गति से चलने वाला सबसे शक्तिशाली ग्रह माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्मों का फलदाता कहा गया है। अच्छे कर्म करने वालों को शनि देव पुरस्कृत करते हैं और बुरे कर्म करने वालों को दंड देते हैं।
शनि चालीसा में शनि देव की महिमा, उनके विभिन्न स्वरूपों और उनकी कृपा पाने के उपायों का वर्णन है। इस चालीसा का नियमित पाठ करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
निष्कर्ष
शनि चालीसा एक अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारी स्तोत्र है। नियमित रूप से श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करने से जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान होता है। शनि देव न्याय के देवता हैं और सत्य, ईमानदारी और अच्छे कर्मों को पुरस्कृत करते हैं।
यदि आप जीवन में किसी कठिनाई से गुजर रहे हैं, आर्थिक परेशानी है, स्वास्थ्य समस्या है या कोई अन्य बाधा है तो शनि चालीसा का नियमित पाठ करें। पाठ के साथ-साथ शनि के चमत्कारी उपाय भी करें और अच्छे कर्म करते रहें।
याद रखें कि शनि देव कर्मफलदाता हैं। केवल पाठ करने से ही सब कुछ नहीं होगा, अच्छे कर्म करना भी उतना ही आवश्यक है। सत्य बोलें, ईमानदारी से जीवन जिएं, दूसरों की मदद करें और शनि चालीसा का नियमित पाठ करें। निश्चित ही शनि देव की कृपा आप पर बनी रहेगी।
जय शनि देव!