माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें पीतांबरा देवी, ब्रह्मास्त्र विद्या की देवी और स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री कहा जाता है। ‘बगला’ का अर्थ है लगाम — अर्थात् जो सबकी लगाम थामे, वह माँ बगलामुखी।माँ के प्रमुख शक्तिपीठ मध्यप्रदेश के दतिया (श्री पीतांबरा पीठ), हिमाचल प्रदेश और मध्यप्रदेश के नलखेड़ा में स्थित हैं। लाखों भक्त इन पावन धामों में दर्शन के लिए आते हैं।
बगलामुखी चालीसा
ॐ ह्रीं बगलामुखी देव्यै नमः
(पाठ से पूर्व इस बीज मंत्र का ११ बार जप करें)
॥ दोहा ॥
पीताम्बरा जगदम्बा माँ, बगलामुखी महारानी।
दुष्टों का नाश करने को, धरती पर हो कल्याणी॥
शत्रु नाशिनी शक्ति तू, स्तम्भन विद्या की देवी।
तेरी शरण में आए हम, रक्षा कर हे माँ सेवी॥
॥ चालीसा ॥
जय बगलामुखी माँ जय जय, जय पीताम्बरा रानी।
दश महाविद्या में शोभित, अमित तेज की खानी॥
पीले वस्त्र धारण करके, पीत आसन पर बैठी।
हाथ मुद्गर शत्रु को, जीभ पकड़े हो ऐठी॥
ह्रीं बीज मंत्र तव माता, त्रिपुर सुंदरी सखी।
काली तारा महाशक्ति, भुवनेश्वरी अखी॥
छिन्नमस्ता भैरवी माँ, धूमावती शांत स्वरूपा।
मातंगी कमला सहित, नवधा शक्ति अनूपा॥
दतिया नगरी में तेरा, पीतांबरा धाम विराजे।
भक्तों की सब इच्छाएँ, तेरे दर पर पूरी साजे॥
शत्रु दमन स्तम्भन करती, वाद-विवाद में जय दे।
न्यायालय में सफलता, कोर्ट केस में जीत दे॥
जो कोई तेरा पाठ करे, नित्य श्रद्धा मन लाए।
उसके सारे कष्ट मिटें, जीवन सुख-शांति पाए॥
तुलसीदल पीले फूलों से, करें अर्चना तेरी।
हल्दी चंदन अर्पण करके, मिटे विपदा घेरी॥
राहु-केतु शनि ग्रह की, पीड़ा तू हर लेती।
मंगलदोष कालसर्प से, रक्षा तू कर देती॥
काले जादू टोने-टोटके, तेरी शक्ति से भागें।
अभिचार और बाधाएँ, तेरे नाम से डर जागें॥
व्यापार में बाधा आए, उद्योग में हो हानि।
माँ का ध्यान धरने से, बदले किस्मत की कहानी॥
वाणी में करती वास तू, बुद्धि को करे प्रखर।
परीक्षा में सफलता हो, ज्ञान बढ़े दिन-दिन भर॥
रोग और व्याधि नाशिनी, आरोग्य की दाता।
भय और शोक हरने को, जगत की तू माता॥
जो नर-नारी इसे पढ़ें, एकाग्र चित्त लगाए।
चालीस दिन पाठ करने से, मनवांछित फल पाए॥
पूर्णिमा और मंगलवार, उपासना का विशेष दिन।
हवन और जप करके, होते पुण्य में लीन॥
तेरे नाम में इतनी शक्ति, ब्रह्मांड हिल जाए।
बगलामुखी माँ की जय, जग सारा गुण गाए॥
दुष्टों की जिह्वा थामे, असुरों का गर्व चूर।
भक्तों का उद्धार करे, रहो माँ हमसे ना दूर॥
स्वर्ण सिंहासन पर बैठी, त्रिनेत्र धारिणी माँ।
मुद्गर हाथ में लेकर, करती शत्रु का शमन॥
भक्त जो तेरा आसरा लें, संकट में घिर जाएँ।
माँ तू उन्हें तत्काल ही, विपदा से उबार जाएँ॥
सप्त धान्य और हल्दी से, यज्ञ-हवन संपन्न।
बगलामुखी मंत्र जपने से, जीवन हो धन्य-धन्य॥
दतिया मैहर और नलखेड़ा, तीर्थ तेरे पावन।
इन धामों में आकर माँ, करते हम अभिवादन॥
जो बाधा और विघ्न हो, तेरी शक्ति से टले।
माँ के चरणों में झुकने से, सफलता राह मिले॥
अंतकाल में भी रहे, तेरा नाम मन में माँ।
बगलामुखी की भक्ति से, मोक्ष मिले सुखधाम॥
दोहा
बगलामुखी चालीसा जो, नित्य पाठ करे जन।
शत्रु नाश धन-यश मिले, पूरे हों मन के मन॥
श्रद्धा-भक्ति से जो पढ़े, माँ की कृपा पाए।
जय बगलामुखी माँ जय, जग में यश बढ़ जाए॥
बगलामुखी चालीसा के पाठ का महत्व
हमारी भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में चालीसा का अर्थ है चालीस छंदों में देवी या देवता की स्तुति। जैसे हनुमान चालीसा भय और संकट-नाश के लिए विख्यात है, उसी प्रकार बगलामुखी चालीसा शत्रु नाश, वाद-विवाद में विजय और जीवन की समस्त बाधाओं के निवारण के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
शास्त्रों में माँ बगलामुखी को ‘ब्रह्मास्त्र विद्या’ की देवी कहा गया है — वह परम शस्त्र जिसे कोई काट नहीं सकता। इनकी स्तंभन शक्ति से शत्रु की बुद्धि, वाणी और कार्यक्षमता एक साथ थम जाती है।
यह चालीसा किनके लिए सबसे उपयोगी है
- न्यायालय, कोर्ट-केस या किसी भी कानूनी विवाद में फँसे लोगों के लिए
- व्यापार में बाधाओं, प्रतिस्पर्धा या धोखाधड़ी से परेशान लोगों के लिए
- शत्रुओं के षड्यंत्र या दुश्मनी से पीड़ित लोगों के लिए
- काले जादू, वशीकरण या तांत्रिक प्रभाव से प्रभावित लोगों के लिए
- परीक्षा, प्रतियोगिता या इंटरव्यू में सफलता चाहने वाले विद्यार्थियों के लिए
- राजनीति, नौकरी या करियर में आगे बढ़ना चाहने वालों के लिए
बगलामुखी चालीसा पढ़ने के फायदे
माँ बगलामुखी चालीसा के नियमित पाठ से जो लाभ प्राप्त होते हैं वे अत्यंत व्यापक हैं। आइए विस्तार से समझते हैं:
शत्रुओं से संपूर्ण रक्षा
माँ की स्तंभन शक्ति से शत्रु की बुद्धि और योजनाएँ स्वतः निष्क्रिय हो जाती हैं। बुरी नजर और षड्यंत्र का प्रभाव समाप्त होता है।
न्यायालय में विजय
कोर्ट-केस या कानूनी विवाद में विरोधी पक्ष कमजोर पड़ता है। माँ की कृपा से न्याय आपके पक्ष में आता है।
व्यापार में उन्नति
व्यापार में आ रही अनावश्यक बाधाएँ और प्रतिस्पर्धा का भय दूर होता है। व्यवसाय में स्थिरता और समृद्धि आती है।
तंत्र-मंत्र से मुक्ति
काला जादू, वशीकरण और नकारात्मक तांत्रिक प्रयोग माँ की शक्ति से पूर्णतः निष्फल हो जाते हैं।
परीक्षा में सफलता
विद्यार्थियों की बुद्धि तीक्ष्ण होती है, एकाग्रता बढ़ती है। परीक्षाओं और प्रतियोगिताओं में बेहतर परिणाम मिलते हैं।
मानसिक शांति
भय, चिंता और मानसिक अशांति दूर होती है। मन में स्थिरता और आत्मबल का संचार होता है।
करियर में उन्नति
नौकरी में दुर्भावनापूर्ण बाधाएँ दूर होती हैं। पदोन्नति और करियर की नई राहें खुलती हैं।
ग्रह दोष निवारण
राहु-केतु, शनि और मंगल दोष से राहत मिलती है। कालसर्प दोष और पितृ दोष के प्रभाव में उल्लेखनीय कमी आती है।
बगलामुखी चालीसा पढ़ने के नियम
माँ बगलामुखी की उपासना बेहद शक्तिशाली है। इसलिए पाठ के नियमों का पालन अनिवार्य है — इससे पाठ की पवित्रता बनी रहती है और अधिकतम फल प्राप्त होता है।
पवित्रता के नियम
- पाठ से पहले स्नान करना अनिवार्य है — शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की शुद्धि जरूरी है।
- पीले वस्त्र धारण करें — यह माँ बगलामुखी का प्रिय रंग है।
- पाठ वाले दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन बिल्कुल न करें।
- महिलाएँ मासिक धर्म के दौरान पाठ से विराम लें।
दिशा और आसन के नियम
- उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें — यह दिशाएँ आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए श्रेष्ठ हैं।
- पीले आसन पर बैठकर पाठ करें। सूती या ऊनी पीला कपड़ा उपयोग करें।
- आसन जमीन पर या लकड़ी के पाटे पर बिछाएँ — सीधे जमीन पर न बैठें।
समय और सामग्री के नियम
- ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः ४ से ६ बजे) सबसे शुभ समय है। संध्याकाल भी उपयुक्त है।
- मंगलवार और पूर्णिमा का दिन माँ के पाठ के लिए विशेष महत्व रखता है।
- घी का दीपक जलाएँ — माँ को तेल का दीपक वर्जित है।
- पीले फूल (गेंदा), हल्दी, पीला चंदन और पीली मिठाई का भोग लगाएँ।
- पाठ को गुप्त रखें — दिखावे और प्रचार से बचें।
बगलामुखी चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए:
| उद्देश्य | पाठ की संख्या | अवधि |
| सामान्य भक्ति / मनोकामना | दिन में १ बार | नित्य, जब तक इच्छा हो |
| शत्रु नाश / कोर्ट-केस | दिन में ३ बार | कम से कम ४० दिन |
| गंभीर संकट / आपात बाधा | दिन में ५ या ११ बार | जब तक समस्या हल न हो |
| विशेष साधना / अनुष्ठान | नित्य अखंड पाठ | लगातार ४० दिन |
| मंगलवार के दिन | कम से कम ३ बार | प्रत्येक मंगलवार |
| पूर्णिमा के दिन | यथाशक्ति अधिक बार | प्रत्येक पूर्णिमा |
बगलामुखी चालीसा पढ़ने की विधि
चरण 1 — स्नान और वस्त्र
सूर्योदय से पहले या संध्याकाल में स्नान करें। पीले वस्त्र पहनें — यह माँ का प्रिय रंग है। पाठ-स्थान को स्वच्छ करें और पीले कपड़े से ढककर माँ की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
चरण 2— दीप-धूप और भोग
माँ के सामने घी का दीपक जलाएँ और धूप-अगरबत्ती प्रज्वलित करें। पीले फूल, हल्दी, पीले चावल अर्पित करें और पीली मिठाई का भोग लगाएँ।
चरण 3 — संकल्प
हाथ में जल या पुष्प लेकर माँ के सामने संकल्प बोलें —
“माँ बगलामुखी! मैं आपकी चालीसा का पाठ [अपना उद्देश्य] की सिद्धि के लिए कर रहा / रही हूँ। कृपया कृपादृष्टि बनाए रखें।”
चरण 4 — बीज मंत्र जप
चालीसा से पूर्व माँ का बीज मंत्र कम से कम ११ बार जपें:
ॐ ह्रीं बगलामुखी देव्यै नमः
चरण 5— एकाग्र मन से पाठ
माँ के चित्र पर ध्यान लगाकर चालीसा पढ़ें। पाठ के दौरान उठें नहीं, बात न करें। कंठस्थ हो तो उत्तम, अन्यथा पुस्तक से पढ़ना भी मान्य है।
चरण 6 — आरती और प्रसाद
पाठ के बाद माँ की आरती करें, भूलचूक के लिए क्षमा माँगें और अपनी मनोकामना विनम्रता से निवेदन करें। प्रसाद परिवार में वितरित करें।
बगलामुखी चालीसा पाठ से जुड़ी सावधानियाँ
माँ बगलामुखी की उपासना अत्यंत शक्तिशाली और संवेदनशील है। इन सावधानियों को गंभीरता से लें:
क्या करें
- एक निश्चित समय पर नियमित पाठ करें
- केवल घी का दीपक जलाएँ
- पीले वस्त्र और पीले आसन का प्रयोग करें
- संकल्प लेकर और नियमितता से पाठ करें
- पाठ में भूल हो जाए तो क्षमा माँगकर आगे बढ़ें
- गुरु का मार्गदर्शन लें — विशेषतः जप-साधना में
क्या न करें
- बिना स्नान किए पाठ न करें
- किसी को नुकसान पहुँचाने की नीयत से पाठ न करें — यह घोर पाप है
- मांस-मदिरा सेवन के बाद पाठ न करें
- पाठ के बीच में उठकर बात न करें
- तेल का दीपक न जलाएँ
- बिना दीक्षा के तांत्रिक प्रयोग न करें
बगलामुखी चालीसा पढ़ने से क्या होता है ?
नियमित चालीसा पाठ से तीन चरणों में बदलाव आता है — तत्काल, मध्यकालीन और दीर्घकालीन:
चरण 1 — तत्काल प्रभाव (१–७ दिन)
- मन में अकारण शांति और स्थिरता का अनुभव शुरू होता है
- नकारात्मक विचारों और भय में उल्लेखनीय कमी आती है
- आत्मविश्वास और निर्णय-क्षमता में वृद्धि महसूस होती है
- घर और कार्यस्थल का वातावरण हल्का और सकारात्मक लगने लगता है
चरण 2 — मध्यकालीन प्रभाव (१–४ सप्ताह)
- शत्रुओं के षड्यंत्र और गतिविधियाँ कमजोर पड़ने लगती हैं
- व्यापार या नौकरी में अनुकूल परिस्थितियाँ बनने लगती हैं
- कानूनी मामलों में आपके पक्ष में स्थिति सुधरती दिखती है
- जमी हुई बाधाएँ स्वयं ही हटती प्रतीत होती हैं
चरण 3 — दीर्घकालीन प्रभाव (४०+ दिन)
- मनोकामनाओं की पूर्ति होती है
- जीवन में स्थायी सुख, शांति और समृद्धि आती है
- आध्यात्मिक चेतना और अंतर्ज्ञान का गहरा विकास होता है
- माँ की निरंतर कृपादृष्टि जीवन के हर क्षेत्र में अनुभव होती है
निष्कर्ष
माँ बगलामुखी की उपासना और बगलामुखी चालीसा का पाठ उन सभी लोगों के लिए एक वरदान है जो जीवन की कठिनाइयों, शत्रुओं, न्यायालयीन विवादों या नकारात्मक शक्तियों से पीड़ित हैं। यह चालीसा न केवल आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि मानसिक दृढ़ता, आत्मविश्वास और जीवन में सकारात्मक बदलाव भी लाती है।